शुक्रवार, 3 नवंबर 2017

!! सैनिक!!


घर दरवाजे सब बंद करके
रातों को जब हम सोते हैं
हमारी नींद में ख़लल पड़े न
इसलिए सीमा पे वे होते हैं।

मटका, सुराही, एसी, फ्रीज
इनमें जब हम गर्मी मिटाते हैं
उस चिलचिलाती गर्मी में भी
वे सीमा पर गश्त लगाते हैं।

गर्म कपड़ा,खाना,पानी और
रजाई में जब हम दुबके होते हैं
उस सर्दी में भी सैनिक सीमा पे
लिए खून में उबाल डटे रहते हैं।

माँ की दवाई, बहन की सगाई
बच्चों का मुंडन भी छूट जाता है
पर सीमा से समझौता कर कभी
कोई सैनिक घर नहीं आता है।

होली, दिवाली, राखी, तीज
सब उनका सीमा पर ही होता
कभी-कभी तो बच्चा पिता को
पहली बार तिरंगे में ही देखता।

उनका जो ऋण है हम सब पर
वो कभी चुकाए नहीं चुकता है
पर उनके परिवारों को दे सहारा
थोड़ा-सा वो कम हो सकता है।


 

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