शनिवार, 2 जून 2018

!! गर्मी की शाम !!

रात की रानी, चमेली की ख़ुशबू
अमिया की भीनी-भीनी सी महक
बगिया के पानी की सौंधी सुगंध
भौरों की गुंजर,चिड़ियों की चहक

सूरज का जाना,चंदा का आना
पुरबयिया का तन मन सहलाना
खुले आसमा में बैठक लगाना
देर तलक बस यूँ ही बतियाना

कभी इसकी बातें,कभी उसकी बातें
बिना चुप्पी कटती थी वो सुंदर रातें
कभी शब्दों का खेल,कभी अंताक्षरी
वे लम्हे नहीं थे,थी समय की सौग़ातें

महफ़िल में होते थे हर एक  रिश्ते
भाई,बहन,माँ,पापा,चाची,दादी सब
कूलर,पंखा, ए॰सी॰ किसी के भी
होते कहाँ थे हम मोहताज तब

गर्मी की शाम भी होती थी सुहावनी
रिश्तों में अलग ही बयार थी ऐसी
न अब वो शाम रही न गर्मी रही
न ही रही महफ़िल वो पुरानी जैसी।

गुरुवार, 31 मई 2018

!! हाँ,हमने देखा है ....!!

हाँ देखा है हमने
गायों को लौट के घर आते
हाँ देखा है हमने
किसानों को बैल से हल चलाते

हाँ देखा है ठंडा-ठंडा पानी
चापाकल से निकलते
हाँ देखा है बुढ़ापा
बचपन के कंधे संभलते

गलियों में भागते बच्चे
पेड़ों पे आम कच्चे
लोग होते थे मन के सच्चे
हाँ हमने देखे हैं दिन अच्छे

माँओं से पिटते बच्चे
माँ को डाँटती नानी
हाँ हमने देखा है
तालाब औ कुएँ का पानी

सफ़ेद झाग वाला ताजा दूध
बिना फ्रीज के ताजा खाना
हमने देखा है भरी दुपहरी
नीम की छांव में सुस्ताना

आँख झुका बड़ों से बतियाना
मिट्टी सने बच्चे गोद उठाना
बिना बताए लोगों का आना
हाँ,देखा है हमने ये ज़माना

इसी सदी बात है ये सब
बस कुछ दशक पीछे
हाँ हमने देखा है ख़ुद को
धीरे-धीरे आते नीचे 

बुधवार, 2 मई 2018

पगडंडी के गीत

मद्धम मद्धम होने लगे
शोर सराबों की बीच
पर मशरूफ़ियत में भी  
मन को लेते वे खींच

कुछ यादें पुरानी
बचपन की कहानी
मन की मनमानी
क्या थी ज़िंदगानी

वो बचपन का गाँव
गाँव की वो पगडंडी
पगडंडी के वे गीत

मन की थिरकन
सिहरन हलचल
जीवन का संगीत

पगडंडी जैसे
अल्हड़-सी लड़की
भागे बलखाती
आरी-तिरछी

हरे-भरे वो खेत मानो
लहराती चुनरी उसकी
चिड़ियों की चहचहाहट
पायल की छमछम जिसकी

पके फ़सल लगते थे जैसे
उसके कानों की हो बाली
हल्के हवा के झोंके से
झूम पड़े बाली संग मतवाली

सीधे-साधे गाँव के लोग
उसके अपने घरवाले
चलती थी वो हँसती गाती
उन सबको संग संभाले

कोयल की कूक
भौरें की गुंजर
कितना सुंदर वो गाती थी

गाती नहीं
जीवन को जैसे
गोद ले सहलाती थी

गाँव छूटा
पगडंडी छूटी
छूट गए पीछे पगडंडी के गीत

बस एक जगह
रस्ता नहीं छूटा
छूटा मन का सबसे प्यारा मीत