शुक्रवार, 13 जुलाई 2018

!! विश्वपटल पे फिर से लहराया धानी परिधान !!



दौड़ी वो लेकर देश का मान
रूकी तो सुरक्षित था सम्मान
डाल दी  अपनी  सारी जान
बन गयी देश का स्वाभिमान

लेकर अपने कंधे पर तिरंगा
कोमल कंधों ने लहरा दिया
माँ की एक बेटी ने फिर से
जग में परचम फहरा दिया

बेटी के कारण जग सारा
कर रहा था माँ का अभिनंदन
जन गण मन पे भीगी आँखें
कर रहे थे सब वतन का वंदन

विश्वपटल पे फिर लहराया
माँ का सुंदर धानी परिधान
एक बेटी ने फिर से बताया
कितना बुलंद है हिंदुस्तान


शुक्रवार, 6 जुलाई 2018

!! अपनी धरती को अपने लिए चलो सब मिल जुलकर बचाए !!

धरती नहीं बचाओगे तो
बोलो कहाँ फिर जाओगे
पेड़ों को यूँ काटोगे तुम
बोलो फल कहाँ पाओगे

कौन देगा धूप में छांव
कौन बारिश से बचाएगा
कहाँ बनाएँगे पंछी घोंसले
कौन हमें झूला झूलाएगा

धूप वर्षा सर्दी गर्मी
सब कुछ तो सहते ये पेड़
फूल भी लेते फल भी लेते
खाल भी इसकी देते उधेड़

ये हरे भरे लहलहाते पेड़
पालते हमें हैं माँ के जैसे
कुछ कुर्सी मेज़ की ख़ातिर
तुम उन्हें काट सकते हो कैसे

पेड़ों से हरियाली छीनी
फेंका है कूड़ा नदियों में
बिगड़ने में महीने साल लगे
सुधरती ग़लती सदियों में

न हवा साफ़ न पानी शुद्ध
सबको गंदा कर छोड़ा हमने
पर्यावरण को करके अशुद्ध
ख़ुद को ही है तोड़ा हमने

प्रदूषण का रोना है रोते
बाढ़ और सूखा को कोसते
ऐसी क्यों हो गयी प्रकृति
ये भला हम क्यों न सोचते

इतनी देर भी नहीं है हुई
चलो हम मिलकर पेड़ लगाए
अपनी धरती को अपने लिए
चलो सब मिल जुलकर बचाए

जो समझा है हमने उसे
चलो औरों को भी समझाए
और अधिक देरी न करना
देर करे वो बहुत पछताए 

शुक्रवार, 29 जून 2018

!! नमन के जो हैं नायक ये उन्हें करते हैं हम सलाम !!

वो दुश्मन को तोड़ के आए
उनके ठिकाने फोड़ के आए
सही जगह पे छोड़ के आए
उनकी कमाने मोड़ के आए

पर घरवालों ने ही पूछे सवाल
बिना बात का किया बबाल
दुश्मन ने जिसे बनाया ढाल
फिर भी न हुआ उन्हें मलाल

माँगे उनके  शौर्य के प्रमाण
लेके गये जो हथेली पे जान
गर आता नहीं करना सम्मान
कम-से-कम न करो अपमान

मिल गया तुमको प्रमाण तेरा
जिसके लिए सेना को भी घेरा
तेरी पद प्रतिष्ठा आनी जानी
पर सिपाही का न बदले बसेरा

लो अब तो कर लो शांति
मिटा लो अपनी सब भ्रांति
रंग में फिर न भंग डालना
शुरू हो जब भी कोई क्रांति

नमन के जो हैं नायक ये
उन्हें करते हैं हम सलाम
छोड़ दो-चार उल्टी खोपड़ी
जन-जन करे उन्हें प्रणाम !